कार्यशाला का आयोजन।

आज दिनांक 27.09.2025 को क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, रानीखेत द्वारा संयुक्त तत्वाधान में गुरूकुल राजकीय पी.जी. आयुर्वेदिक कॉलेज, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) स्थित चरक सभागार में “Knowledge, Attitude and Practice towards Pharmacovigilance of Ayurvedic Medicines among Registered Ayurvedic Medical Practitioners of Uttarakhand” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

आज दिनांक 27.09.2025 को क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, रानीखेत द्वारा संयुक्त तत्वाधान में गुरूकुल राजकीय पी.जी. आयुर्वेदिक कॉलेज, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) स्थित चरक सभागार में “Knowledge, Attitude and Practice towards Pharmacovigilance of Ayurvedic Medicines among Registered Ayurvedic Medical Practitioners of Uttarakhand” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि माननीय प्रो (डॉ.) अरूण कुमार त्रिपाठी जी, कुलपति, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखण्ड एवं आभासीय माध्यम से जुड़े प्रो. (वैद्य) रबिनारायण आचार्य जी, महानिदेशक, केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) पंकज कुमार शर्मा जी, डीन यू.ए.यू, देहरादून, प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र सिंह जी, कैंपस निदेशक, पी.जी. आयुर्वेदिक कॉलेज, ऋषिकुल कैंपस, यूएयू, हरिद्वार; प्रो. (डॉ.) गिर्राज प्रसाद गर्ग जी, कैंपस निदेशक, पी.जी. आयुर्वेदिक कॉलेज, गुरुकुल कैंपस, यूएयू, हरिद्वार उपस्थित रहें। कार्यशाला का प्रारम्भ भगवान धनवन्तरी के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ धन्वंतरि वंदना से किया गया तत्पशात् डॉ. ओम प्रकाश जी, प्रभारी सहायक निदेशक, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, रानीखेत द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को पुष्प गुच्छ दे मंच पर स्वागत किया गया एवं कार्यशाला के विषय परिचय से सभी को अवगत कराया गया।
उनके द्वारा बताया गया कि संस्थान में चल रही फॉर्माकोविजलेस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में पंजीकृत आयुष चिकित्सकों को आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों, प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं तथा उनसे जुड़ी अन्य समस्याओं की पहचान, मूल्यांकन, समझ और रोकथाम करना है। यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है ताकि रोगियों को सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार देने हेतु जागरूक किया जा सके। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर अरुण त्रिपाठी ने कहा की वर्तमान समय में आयुर्वेदिक औषधियां की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एवं जन सामान्य आयुर्वेद के विश्वास को स्थापित करने के लिए फॉर्मकोविजीलेस की बहुत आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के दिन प्रोफेसर पंकज शर्मा ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियां का भी निरंतर एसेसमेंट, डिटेक्शन एवं मॉनिटरिंग होनी चाहिए। सभी लोगों को एडवर्स ड्रग रिएक्शन एवं ए.डी.आई. को उपयुक्त माध्यम से रिपोर्ट करना चाहिए । प्रोफेसर डीसी सिंह ने आयुर्वेदिक औषधियां के साइड इफेक्ट एवं एडवर्स ड्रग रिएक्शन के उदाहरण सहित विषय को समझाया। गुरुकुल के प्रश्न निदेशक प्रोफेसर गिरिराजगर्ग ने में आज के समय में सभी को औषधीय का प्रयोग करते समय फार्माको विजिलेंस के लिए सजग रहने को कहा। तथा कैंपस में इस महत्वपूर्ण प्रोग्राम करने के लिए सेंट्रल कौंसिल ऑफ़ रिसर्च का धन्यवाद व्यक्त किया।
अन्य सभी अतिथियों द्वारा कार्यशाला हेतु उदबोधन दिया गया। अतिथियों के उदबोधन पश्चात् आभासीय माध्यम से जुड़े प्रो. (वैद्य) रबिनारायण आचार्य जी, महानिदेशक, सी.सी.आर.ए.एस., नई दिल्ली द्वारा कार्यशाला की उपयोगिता के विषय में अपना उद्बोधन दे कार्यशाला की सफलता की कामना की गयी। इस कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञ वक्ताओं ने निम्न विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किएः
1.डॉ. राजीव कुरेले, एसोसिएट प्रोफेसर, मेन कैंपस, यू.ए.यू., देहरादून द्वारा भ्रामक विज्ञापन और D.M.R. अधिनियम के विषय पर व्याख्यान दिया गया।
2.डॉ. किरण वशिष्ठ, सहायक प्रोफेसर, यूएयू, देहरादून द्वारा आयुसुरक्षा पोर्टल के उपयोग संबंधी लाइव प्रदर्शन किया गया।
3.कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. तरुण कुमार, अनुसंधान अधिकारी (आयु.), क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ,रानीखेत द्वारा फार्माकोविजिलेंस के विषय पर जागरूकता व्याख्यान दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन डॉ. प्रीति सेमवाल, जे.आर.एफ. ,उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आए हुए प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से किया गया।कार्यशाला में हरिद्वार जिले के कुल 145 पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सकों, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों एवं पी.जी. छात्रों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

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