श्रद्धालुओं पर सख्ती, अतिक्रमणकारियों पर नरमी; हर की पौड़ी में दोहरे मापदंड पर उठे सवाल
सोमवती अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार में तीन दिन का विशेष यातायात प्लान लागू किया गया है। हर की पौड़ी क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन श्रद्धालुओं को कहीं भी रुकने नहीं दे रहा, सड़क किनारे स्कूटर खड़ा करने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस चौकी के बिल्कुल पास ही नो पार्किंग जोन के नीचे अतिक्रमण का बाजार सजा हुआ है। सवाल यह है कि जब आम लोगों पर इतनी सख्ती है, तो फिर यह अतिक्रमण आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है?
हर की पौड़ी में इन दिनों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लोगों को सड़क किनारे खड़े होने तक की अनुमति नहीं दी जा रही, स्कूटर और वाहनों को तत्काल हटाया जा रहा है।
लेकिन तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि नो पार्किंग बोर्ड के ठीक नीचे फल विक्रेताओं और प्लास्टिक कैन बेचने वालों ने कब्जा जमा रखा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा अतिक्रमण पुलिस चौकी के नजदीक मौजूद है। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ी होगी।
जहां लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही हो रही हो, वहां फुटपाथ और रास्तों पर इस तरह का अतिक्रमण किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। भीड़ के दबाव में यदि भगदड़ जैसी स्थिति बनती है तो ये अस्थायी दुकानें और सामान लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं।
एक तरफ प्रशासन अतिक्रमण हटाने के नाम पर शहर भर में अभियान चलाता है, गरीब व्यापारियों का सामान जब्त करता है, वहीं दूसरी तरफ हर की पौड़ी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में खुलेआम कब्जा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जब पुलिस चौकी के सामने ही नो पार्किंग जोन अतिक्रमण की चपेट में हो, तो फिर शहर के बाकी हिस्सों की व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। श्रद्धालुओं को नियमों का पाठ पढ़ाने वाला प्रशासन क्या अब अपने सामने हो रहे इस अतिक्रमण पर भी कार्रवाई करेगा या फिर नियम केवल आम जनता के लिए ही बने हैं?
“श्रद्धालु रुके तो कार्रवाई, अतिक्रमण रुके तो खामोशी… आखिर हर की पौड़ी में किसे मिला है नियम तोड़ने का विशेष अधिकार?”

