राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संत संगोष्ठी का आयोजन

💥राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संत संगोष्ठी का आयोजन
🔥राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ, माननीय श्री सुरेश जी उपाख्य भैयाजी जोशी जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित
🌸परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, योगऋषि स्वामी रामदेव जी, स्वामी श्री राजराजेश्वरानन्द जी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतना नन्द जी, स्वामी श्री रूपेन्द्र प्रकाश जी, स्वामी श्री ललितानन्द जी एवं अनकों पूज्य संतों का पावन सान्निध्य
ऋषिकेश, 17 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक विशेष संत संगोष्ठी का आयोजन हरिद्वार में किया गया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ, माननीय श्री सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, योगऋषि स्वामी रामदेव जी, स्वामी श्री राजराजेश्वरानंद जी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद जी, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश जी, स्वामी ललितानंद जी सहित अनेकों पूज्य संतों का पावन सान्निध्य रहा।

इस अवसर पर संघ की सौ वर्षों की यात्रा को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया। आदरणीय डॉ. हेडगेवार जी द्वारा 1925 में प्रज्वलित की गई छोटी सी ज्योति आज एक विश्वव्यापी प्रकाश पुंज बन चुकी है। संघ, भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना का अक्षयवट है, जो समाज को एकता, सेवा और संस्कार का अमृत प्रदान करता रहा है। संघ की जड़ें हमारे महापुरुषों के तप, त्याग और अटूट समर्पण से गहरी हुई हैं, जिसने इसे हर चुनौती और संकट में अडिग रखा।

कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि संघ केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि एक जीवंत धरोहर है, जिसने भारतीय समाज को उसकी जड़ों से जोड़े रखा। संघ ने यह सिद्ध किया है कि राष्ट्र का सशक्तिकरण केवल राजनीति से नहीं, बल्कि समाज की जागृति, संगठन शक्ति और संस्कार से है। शाखाओं और विद्यालयों के माध्यम से संघ ने अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभावना के बीज रोप कर करोड़ों युवाओं को अपने मूल से जोड़ा।

संतों ने इस अवसर पर संघ के योगदान को नमन करते हुए बताया कि संघ के स्वयंसेवक हर संकट में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। 2001 का गुजरात भूकंप हो, 2013 की केदारनाथ त्रासदी, वैश्विक महामारी या प्राकृतिक आपदा, संघ परिवार ने भोजन वितरण, रक्तदान, राहत शिविर, पीड़ित परिवारों और निराश्रित बच्चों की सेवा में अद्भुत योगदान दिया। उनकी निःस्वार्थ सेवा ही उनके जीवन का यज्ञ है।

संगोष्ठी में यह भी रेखांकित किया गया कि संघ का हिन्दूत्व केवल धार्मिकता का विषय नहीं है, बल्कि मानवता के कल्याण का मार्ग है। संघ संकीर्णता नहीं, बल्कि वसुधैव कुटुम्बकम् की व्यापक चेतना का वाहक है। आज जब भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है, संघ का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह शताब्दी वर्ष न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा है, यह याद दिलाता है कि जड़ों से जुड़े रहकर ही हम विश्व में उजाला फैला सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर उन लाखों स्वयंसेवकों की निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने अपने जीवन को “इदम् राष्ट्राय इदम् न मम्” की भावना से राष्ट्र और मानवता की सेवा में समर्पित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति और सेवा की भावना से हुआ।
जिला संचालक, हरिद्वार डा यतीन्द्र नागयान जी, धार्मिक श्रेणी प्रमुख, सम्पर्क विभाग हरिद्वार, श्री स्वामी साधनानन्द जी और पूरी टीम ने अद्भुत योगदान दिया।

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