देश का सम्मानित वैज्ञानिक अनशन पर… आखिर उनकी आवाज़ कौन सुनेगा?
नई दिल्ली। देश के जाने-माने इंजीनियर, पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन और भूख हड़ताल से जुड़े रहे। उनकी मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, कथित परीक्षा अनियमितताओं और NEET विवाद जैसे मामलों पर गंभीर कार्रवाई हो तथा जिम्मेदारी तय की जाए। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
सोनम वांगचुक कोई आम आंदोलनकारी नहीं हैं। वे रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित इंजीनियर हैं, SECMOL के संस्थापक हैं और लद्दाख में शिक्षा व पर्यावरण के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे हैं।
लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल देश के युवाओं के मन में है…
क्या एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक को अपनी बात रखने के लिए अनशन पर बैठना पड़े, यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है?
क्या शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच खुलकर संवाद होना चाहिए?
क्या लाखों छात्रों की चिंताओं का समाधान केवल बयानबाज़ी से होगा, या ठोस जवाबदेही की भी ज़रूरत है?
इन सवालों के जवाब देश जानना चाहता है।
**आपकी क्या राय है? क्या ऐसे आंदोलनों पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच तुरंत संवाद होना चाहिए? कमेंट करके अपनी राय ज़रूर बताइए।**

