महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि की यह पावन रात्रि सिर्फ व्रत और पूजन का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिव कृपा पाने का दुर्लभ संयोग है,
महा शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था और माता पार्वती के साथ उनका विवाह भी इसी दिन हुआ था.
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि 16 फरवरी, सोमवार को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी. चतुर्दशी तिथि रात्रि में पड़ने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा.
महाशिवरात्रि की रात को चार भागों में बांटकर शिव पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है.
प्रथम प्रहर पूजा: 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक
द्वितीय प्रहर पूजा: 15 फरवरी रात 9:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:34 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा: 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक
चतुर्थ प्रहर पूजा: 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक
इसके अलावा, निशीथ काल पूजा 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक की जा सकती है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है.
15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन कई शुभ योग बन रहे है. इस दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव व व्यतिपात योग भी रहेंगे.
यह दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के लिहाज से भी खास रहेगा
महा शिवरात्रि पर 5 बिल्वपत्र पर राम लिख भगवान शिव को करे अर्पित धन संबंधी कष्टों से मिलेगा छुटकारा
अंक के 3 पत्तों पर केसर और चंदन से लिखे ॐ नमः शिवाय ऐसा करने से पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी ।।
भगवान शिव का करे अभिषेक
दूध से – मन शांति के लिए
गन्ने के रस से – धन प्राप्ति के लिए
सरसों के तेल से – शत्रु नाश के लिए
गिलोय के रस से – आरोग्य के लिए
गंगा जल से – शिव भक्ति के लिए आदि
आचार्य विकास जोशी कहते है भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि है इसमें तीन ही प्रकार से शिव की पूजा बताई है सात्विक, राजसिक,तामसिक जो जिस भाव से शिव की पूजा करता है उसे उसी प्रकार से शिव फल प्रदान करते है
गृहस्थ लोग सात्विक (सुख शांति, भक्ति ) और राजसिक पूजा (धन ऐश्वर्य) भगवान की करते है जिसमें सात्विक पूजा में दूध दही घी शहद बेल पत्र फूल मिठाई और फलों द्वारा राजसिक में भांग धतूरा रुद्राक्ष कमल पुष्प आदि से वही तामसिक पूजा अघोर साधना है भस्म आरती भस्म श्रृंगार आदि से शिव को प्रसन्न किया जाता है महा शिवरात्रि में यह सभी पूजन विशेष फल प्रदान करते है ।
आचार्य विकास जोशी
नारायण ज्योतिष संस्थान

