मजा लेना है जिंदगी का,
कुछ चीजें छोड़ दीजिए।
इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क होता है,
उम्मीदें लगाना छोड़ दीजिए।
जो हालात है, यही सबसे बेहतर हैं,
ये हो जाए, वो हो जाए,
ये कहना छोड़ दीजिए।
राम नहीं फिर क्यों
उम्मीद करूँ सीता की,
अच्छे नहीं हैं लोग,
उलाहना छोड़ दीजिये।
अच्छी लगे सबको मेरी बात,
ये जिद भी क्यों रखनी,
महंगी लगे या सस्ती,
ये उनपर छोड़ दीजिए।।

