हल्द्वानी की आग चेतावनी है, अगला नंबर किसका? लखनऊ के 15 चिराग बुझने के बाद भी क्या नहीं जागे सिस्टम के जिम्मेदार!
हल्द्वानी/देहरादून। हल्द्वानी के स्कूल परिसर में लगी आग भले ही इस बार किसी मासूम की जान नहीं ले सकी, लेकिन इस घटना ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिर प्रदेशभर में चल रहे स्कूलों, कोचिंग सेंटरों और बेसमेंट में संचालित शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है?
अभी दो दिन पहले ही लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर और कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने 15 युवाओं की जान ले ली। कई छात्र धुएं और आग के बीच फंस गए, कुछ को जान बचाने के लिए ऊंचाई से कूदना पड़ा। प्रारंभिक जांच में आपातकालीन निकास और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। घटना के बाद SIT जांच बैठी, गिरफ्तारियां हुईं और प्रदेशव्यापी फायर सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए गए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार कार्रवाई किसी हादसे के बाद ही होगी?
उत्तराखंड में भी दर्जनों स्कूल, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल और शिक्षण संस्थान ऐसे हैं जहां बेसमेंट में कक्षाएं संचालित हो रही हैं, एक ही एंट्री-एग्जिट के सहारे सैकड़ों बच्चों की जिंदगी दांव पर लगी है और फायर सेफ्टी के नाम पर सिर्फ कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यदि किसी दिन ऐसी इमारत में आग लग जाए तो क्या बच्चों को बाहर निकलने का मौका भी मिलेगा?
आज हल्द्वानी में आग लगी है, कल किसी और शहर में लग सकती है। तब फिर वही मातम होगा, वही चीखें होंगी, वही अस्पतालों के बाहर बिलखते परिवार होंगे। किसी मां की गोद सूनी होगी, किसी पिता का सहारा छिनेगा और किसी घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ जाएगा।
जनता की मांग है कि प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर सभी स्कूलों, कोचिंग सेंटरों और बेसमेंट में संचालित संस्थानों की तत्काल जांच कराई जाए। जिन संस्थानों में फायर एनओसी नहीं है, आपातकालीन निकास नहीं है या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है, उन्हें बिना देरी सील किया जाए।
प्रशासन से सीधा सवाल—क्या उत्तराखंड को भी किसी लखनऊ जैसे दर्दनाक हादसे का इंतजार है? या फिर समय रहते कार्रवाई कर हजारों बच्चों की जिंदगी सुरक्षित की जाएगी?

