करोड़ों की राशि जारी, लेकिन ज़मीन पर सन्नाटा! हरिद्वार शहर से नदारद आरोग्य केंद्र
हरिद्वार : शहर की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शहरी विकास विभाग द्वारा आरोग्य केंद्र (आरोग्य मंदिर) खोलने की योजना चलाई जा रही है, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हरिद्वार में इस योजना का लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा।
योजना के तहत हरिद्वार जिले के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों के पिछड़े इलाकों में आरोग्य केंद्र खोले जाने थे। हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र में 14 स्थानों पर आरोग्य मंदिर स्थापित किए जाने थे, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश स्थानों पर केंद्र आज तक खुले ही नहीं हैं। जहां कुछ केंद्र खोले भी गए हैं, वहां स्थानीय निवासियों को कोई ठोस लाभ नहीं मिल पा रहा।
वित्तीय स्थिति पर नजर:
हरिद्वार नगर निगम को 14 आरोग्य मंदिरों के संचालन के लिए ₹9 करोड़ 66 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई। इस राशि में से निगम की कार्यदायी संस्था को 40 प्रतिशत फंड भी जारी कर दिया गया, इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर न तो व्यवस्थाएं नजर आ रही हैं और न ही स्वास्थ्य सेवाएं।
कई चिन्हित क्षेत्रों में हालात यह हैं कि सामान्य बुखार या मौसमी बीमारियों की दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं।
इन क्षेत्रों में खुलने थे आरोग्य केंद्र:
लेबर कॉलोनी, सीतापुर, बैरागी कैंप, त्रिमूर्ति नगर, जगजीतपुर, विष्णुलोक कॉलोनी, बाल्मीकि बस्ती, संजय नगर, तेवड़ी, डोगरीला बस्ती, राजीव नगर, टंकी नंबर-6, निर्मला छावनी, लाल मंदिर फुटबॉल मैदान और दुर्गा नगर।
सूत्रों के अनुसार आरोग्य मंदिरों के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है, जबकि अब दूसरी किस्त का इंतजार किया जा रहा है। अब तक जो धनराशि दी गई है, वह केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए स्वीकृत की गई थी।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि 10 आरोग्य मंदिरों से जुड़े दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं, जबकि चार स्थानों की लोकेशन स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि केवल उपयुक्त और पूर्व-चिन्हित स्थलों पर ही केंद्र खोले जाएं।
प्रशासन का पक्ष:
मुख्य नगर आयुक्त हरिद्वार, नंदन कुमार के अनुसार,
“कुछ स्थानों का निरीक्षण किया गया है, जहां व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई हैं। जहां भी लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
सवाल बरकरार:
जब करोड़ों रुपये स्वीकृत और जारी हो चुके हैं, तो फिर हरिद्वार शहर में आरोग्य केंद्र आम जनता को राहत क्यों नहीं दे पा रहे।

