दिल्ली–नोएडा में सत्यापन अभियान से कोहराम, हरिद्वार में भी बढ़ी चिंता: ‘नो-वेरीफिकेशन’ कामगार बने अपराधों की जड़
हरिद्वार। दिल्ली और नोएडा में चल रहे बड़े स्तर के सत्यापन अभियान ने अवैध रूप से रह रहे और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों में हड़कंप मचा दिया है। वहां झुग्गियों का खाली होना, रातों-रात लोगों का गायब हो जाना और पुलिस की सख्त कार्रवाई ने दूसरे शहरों में भी चिंता बढ़ा दी है। इसी क्रम में हरिद्वार में भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई जा रही है।
हरिद्वार पुलिस भले ही किरायेदार सत्यापन अभियान चला रही है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि खतरा केवल किरायेदारों तक सीमित नहीं है। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनकी न पहचान है, न स्थाई पता और न ही कोई सत्यापन रिकॉर्ड। ये लोग कॉलोनियों में कुछ घंटों के लिए आते हैं, गाड़ियां धोते हैं, कबाड़ लेने के नाम पर घर-घर पहुंचते हैं, कार वॉशर बनकर घूमते रहते हैं या मजदूरी के बहाने घरों की निगरानी करते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन्हीं में से कई रात के समय चोरी, नकबजनी और स्नैचिंग की घटनाओं को अंजाम देते हैं।
हाल ही में चलाया गया ऑपरेशन ‘कालनेमी’ भी इस खतरे की पुष्टि करता है, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक फर्जी बाबा और संदिग्ध लोग पकड़े गए। इससे साफ हुआ कि बड़े पैमाने पर ऐसे व्यक्ति बिना किसी पहचान या पंजीकरण के शहर में डेरा जमाए हुए हैं।
जनता की मांग है कि अब किरायेदारों की तरह ही लेबर क्लास, अस्थाई कामगारों, घर–घर सेवाएं देने वालों और कॉलोनी–कॉलोनी घूमने वाले लोगों का भी सत्यापन अनिवार्य किया जाए। साथ ही, बिना पुलिस पंजीकरण और वैध आईडी के किसी को भी शहर में काम करने की अनुमति न दी जाए।
हरिद्वार वासियों का कहना है कि यह सिर्फ औपचारिक कार्रवाई का मुद्दा नहीं बल्कि शहर की सुरक्षा और शांति का सवाल है। अब सभी की निगाहें पुलिस और प्रशासन पर हैं कि क्या वे दिल्ली–नोएडा मॉडल की तर्ज पर हरिद्वार में भी कठोर और व्यापक सत्यापन अभियान शुरू करेंगे।
स्पष्ट है कि अब हरिद्वार जाग चुका है और सुरक्षा को लेकर जनता की मांग पहले से कहीं ज्यादा तेज़ हो गई है।

