“IndiGo संकट: 4,500+ उड़ानें रद्द, हजारों यात्री फंसे — सरकार व DGCA ने दिखाई सख़्त रफ्तार”
- “ROSTER और पायलट रूल्स के उल्लंघन पर DGCA ने इंडिगो को दिया 5% कटौती का निर्देश”
- “पैसेंजर्स का भरोसा टूटा — शादी, परीक्षा, काम सब रुके, मुआवज़ा तय, लेकिन सवालों की भरमार”
- “देश के हवाई-सफर को झकझोड़ा: अब सिर्फ यात्री नहीं, नियामक और एयरलाइन दोनों को जवाब देना होगा”
उड़ानों की बर्बादी’ से आम यात्री बेहाल
पिछले सप्ताह से देश में चल रहा इंडिगो का परिचालन संकट अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। 1 दिसंबर के बाद शुरू हुए नए क्रू रेस्ट/ड्यूटी नियमों (FDTL / IROPS) के बाद से पायलट-क्रू की कमी, गलत रोस्टर प्लानिंग और संसाधन-तैयारी की कमी की वजह से 4,500 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।
इस वजह से देश भर में हजारों यात्री — जिनकी फ्लाइट शादी, परीक्षा, ऑफिस या जरूरी काम से जुड़ी थी — अचानक फँस गए। कुछ का सामान एयरपोर्ट पर अटका, कुछ रिफंड-प्रक्रिया में उलझे रहे।
नियामक ने साधा डंडा — DGCA का तुगलकी फैसला
DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने इंडिगो के सीईओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को समन भेज दिया है और 24 घंटे में जवाब मांगा है।
साथ ही DGCA ने इंडिगो को निर्देश दिया है कि रोज़ाना की उड़ानों में 5 % कटौती की जाए और 10 दिसंबर तक नया शेड्यूल जमा किया जाए।
सरकार ने यह साफ किया है कि “यात्रियों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी” — रिफंड, बैगेज वापस, वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवज़ा देने का आदेश दे चुकी है।
यात्रियों में गुस्सा, सोशल मीडिया पर हंगामा
सोशल मीडिया और हवाई अड्डों पर यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई लोग कह रहे हैं — “टिकट लेकर आए थे, भरोसा था, लेकिन हमारी ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई”— कई की शादी रद्द, काम छूटा, परीक्षा छूट गई।
कुछ यात्रियों ने बताया कि उनका सामान एयरपोर्ट पर गायब हो गया, चाबियाँ, दस्तावेज — सब वहीं रह गए।
अब सवाल — एविएशन सेफ्टी या मुनाफा-प्रबंधन का मकड़जाल?
विशेषज्ञ कह रहे हैं कि जब पायलट ड्यूटी नियम बने हैं — ताकि थकावट न हो और सुरक्षा बनी रहे — तो एयरलाइनों को समय रहते संसाधन तैयार करने चाहिए थे। लेकिन इंडिगो ने यह काम व्यवस्थित नहीं किया, जिससे यह घातक “क्राइसिस” सामने आया।
अब सवाल है: क्या सिर्फ रद्द उड़ानें ही रोकना पर्याप्त है? या विस्तृत ऑडिट, रोस्टर प्लानिंग, बजट-प्रबंधन और यात्रियों को भरोसा दिलाने की जिम्मेदारी भी इंडिगो और सरकार की बनती है?
जागरूकता
- यात्रियों को चाहिए कि वे अपने अधिकार जागरूक हों — रद्द उड़ान पर पूरा रिफंड, वैकल्पिक व्यवस्था, मुआवज़ा आदि मांगें।
- प्रेस-मीडिया को चाहिए कि वे यात्रियों की कहानियाँ सामने लाएँ, ताकि इस संकट की असल चोट दिख सके।
- सरकार और नियामक को चाहिए कि वे ऐसे मामलों पर सख़्त कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में कोई और एयरलाइन इसी तरह का भरोसा तोड़ने का रिस्क न ले।

