पावन प्रज्ञा पुराण कथा


शांतिकुज जोनल कार्यालय गायत्री शक्तिपीठ नजीबाबाद मे पावन प्रज्ञा पुराण कथा आयोजित की गयी। व्यासपीठ पर आसीन कथा वाचक , गायत्री शक्तिपीठ व्यवस्थापक डा० दीपक कुमार ने कहा कि कथा व्यक्ति की व्यथा हर लेती है । युग ऋषि वेद मूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्री रामशर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण 18 पुराणों का सार है। पावन प्रज्ञा पुराण कथा प्रज्ञा अर्थात सदबुद्धि, सदविवेक की कथा है भारत की संयुक्त परिवार व्यवस्था महान व्यवस्था थी दादा-दादी-नाना-नानी की गोद में बैठकर महापुरुषों की कथाएं सुनकर व्यक्ति महान बनता था। बुजुर्गो की सेवा करें। पति-पत्नी एक गाडी के दो पहिए होते है । एक पक्षी के दो पंख होते है। दोनो का संस्कारवान, स्वावलंबी होना आवश्यक है। गृहस्थाश्रम सबसे बड़ा आश्रम है जिसमें संयम सेवा और सहीष्णुता की साधना करनी पड़ती है बच्चे बड़ों का आचरण देखकर ही अनुसरण करते हैं अतः हम स्वयं चरित्रवान बने संस्कारवान बने, सेवा भावी बने, परमार्थी बने । परिवाजक रोहिताश सिंह , सत्यप्रकाश राजपूत , एचपी गुप्ता, सारिका अग्रवाल , श्यामकुमारी सक्सेना आदि रहे ।

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